राजस्थान के तीन अपवाह तंत्र
अपवाह तंत्र यानी नदियों का वह जाल जो बताता है कि बारिश का पानी कहाँ से कहाँ जाता है। राजस्थान शुष्क राज्य है, इसलिए यहाँ नदियाँ कम हैं और बारहमासी नदी केवल एक — चम्बल।
राजस्थान की नदियाँ एक नक्शे में — बंगाल की खाड़ी, अरब सागर और आंतरिक प्रवाह, तीनों तंत्र एनिमेशन के साथ। नदी पर टैप कीजिए: उद्गम, बहाव के ज़िले, सहायक नदियाँ, बाँध और संगम सामने आ जाएँगे।
अपवाह तंत्र यानी नदियों का वह जाल जो बताता है कि बारिश का पानी कहाँ से कहाँ जाता है। राजस्थान शुष्क राज्य है, इसलिए यहाँ नदियाँ कम हैं और बारहमासी नदी केवल एक — चम्बल।
नक्शा समझने के लिए बनाया गया है, नापने के लिए नहीं — नदियों की रेखाएँ लगभग हैं। बिंदीदार रेखा वहाँ है जहाँ नदी सूखकर लुप्त हो जाती है।
Handwritten Notes
राजस्थान GK के हाथ से लिखे नोट्स में अपवाह तंत्र का पूरा अध्याय है — नक्शे, तालिकाएँ, याद रखने की ट्रिक और क्विज़ के साथ, RAS, पटवारी, CET और अन्य परीक्षाओं के लिए।
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राजस्थान शुष्क राज्य है, इसलिए नदियाँ कम हैं। अरावली के पूर्व की नदियाँ चम्बल के रास्ते बंगाल की खाड़ी की ओर जाती हैं, पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम की नदियाँ गुजरात होकर अरब सागर की ओर, और बाक़ी रेगिस्तान में ही खो जाती हैं।
24% राज्य का भाग
पानी कहाँ जाता है: यमुना → गंगा → बंगाल की खाड़ी
अरावली के पूर्व और दक्षिण-पूर्व का भाग। यहाँ की नदियाँ चम्बल में मिलती हैं और चम्बल यमुना में; यमुना गंगा से मिलकर बंगाल की खाड़ी में पहुँचती है।
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याद रखें: राज्य की सदा बहने वाली इकलौती नदी चम्बल इसी तंत्र की है। यमुना में सीधे पानी ले जाने वाली राज्य की नदियाँ केवल चम्बल और गम्भीर हैं।
16% राज्य का भाग
पानी कहाँ जाता है: गुजरात → अरब सागर (खंभात की खाड़ी / कच्छ का रन)
अरावली के पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम का भाग। माही और साबरमती खंभात की खाड़ी में गिरती हैं; लूनी और पश्चिमी बनास कच्छ के रन में खो जाती हैं।
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याद रखें: पश्चिमी राजस्थान की सबसे लम्बी नदी लूनी है और माही राज्य की इकलौती नदी है जिसका प्रवेश व निकास दोनों दक्षिण से होता है।
60% राज्य का भाग
पानी कहाँ जाता है: किसी समुद्र तक नहीं पहुँचतीं — रेत, झील या मैदान में लुप्त
राज्य का सबसे बड़ा भाग (60%)। यहाँ की नदियाँ मरुस्थल, खारी झील या मैदान में ही सूख जाती हैं और समुद्र तक नहीं पहुँचतीं।
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याद रखें: देश में सबसे अधिक अंतःप्रवाही नदियाँ राजस्थान में हैं, क्योंकि यहाँ मरुस्थल का विस्तार सबसे अधिक है।
सबसे ज़्यादा पूछी जाने वाली नौ नदियाँ — कुल लम्बाई, राजस्थान में बहाव और एक ख़ास बात।
| नदी | अपवाह तंत्र | कुल लम्बाई | राजस्थान में | ख़ास बात |
|---|---|---|---|---|
| चम्बल | बंगाल की खाड़ी | 1051 किमी | 322 किमी | राज्य की इकलौती बारहमासी नदी |
| माही | अरब सागर | 576 किमी | 171 किमी | प्रवेश और निकास दोनों दक्षिण से; कर्क रेखा दो बार पार |
| बनास | बंगाल की खाड़ी | 512 किमी | पूरी | सबसे बड़ा जलग्रहण क्षेत्र; चम्बल की सबसे बड़ी सहायक |
| लूनी | अरब सागर | 495 किमी | 330 किमी | पश्चिमी राजस्थान की सबसे लम्बी; आधी मीठी, आधी खारी |
| घग्घर | आंतरिक प्रवाह | 465 किमी | 100 किमी | आंतरिक प्रवाह की सबसे लम्बी नदी |
| साबरमती | अरब सागर | 416 किमी | 45 किमी | उदयपुर से निकलकर गुजरात जाती है |
| कालीसिंध | बंगाल की खाड़ी | 278 किमी | 145 किमी | नौनेरा (कोटा) के पास चम्बल में |
| पश्चिमी बनास | अरब सागर | 260 किमी | लगभग 50 किमी | सिरोही से निकलकर कच्छ के रन की ओर |
| बाणगंगा | बंगाल की खाड़ी | 240 किमी | — | अर्जुन की गंगा; अब भरतपुर में लुप्त |
हर तंत्र की नदियाँ अलग-अलग तालिका में हैं। मानचित्र पर वही नदी टैप करके उसका रास्ता देखें।
| नदी | उद्गम | समापन / मिलन | बहाव के ज़िले |
|---|---|---|---|
| चम्बल | जानापाव की पहाड़ियाँ (महू के पास, मध्य प्रदेश) — विंध्याचल | मुरादगंज (औरैया, उत्तर प्रदेश) के पास यमुना में | चित्तौड़गढ़, कोटा, बूँदी, सवाई माधोपुर, करौली, धौलपुर |
| छोटी कालीसिंधचम्बल की सहायक | मध्य प्रदेश; मागसी गाँव (झालावाड़) से राज्य में आती है | मकेरिया गाँव (झालावाड़–मध्य प्रदेश सीमा) के पास चम्बल में | झालावाड़ |
| कालीसिंधचम्बल की सहायक | बागली गाँव की पहाड़ियाँ (देवास, मध्य प्रदेश) | नौनेरा (नवनेरा), कोटा के पास चम्बल में — दायाँ किनारा | झालावाड़, बाराँ, कोटा |
| आहूकालीसिंध की सहायक | सुसनेर (मध्य प्रदेश); नंदपुर (झालावाड़) से राज्य में | गागरोन (झालावाड़) में कालीसिंध में — संगम "सामेला" | झालावाड़, कोटा |
| परवनकालीसिंध की सहायक | विंध्याचल, मालवा पठार (मध्य प्रदेश) — अजनार और घोड़ा-पछाड़ धाराओं से | पलायता (बाराँ) के पास कालीसिंध में | झालावाड़, बाराँ, कोटा |
| पार्वती (बाराँ–कोटा)चम्बल की सहायक | सेहोर (मध्य प्रदेश) की विंध्याचल पहाड़ियाँ; करियाहट (बाराँ) से राज्य में | पालीघाट (सवाई माधोपुर) के पास चम्बल में — दायाँ किनारा | बाराँ, कोटा |
| मेजचम्बल की सहायक | बिजौलिया (भीलवाड़ा) | बसवाड़ा गाँव (बूँदी) में चम्बल में — बायाँ किनारा | भीलवाड़ा, बूँदी |
| बनासचम्बल की सहायक | वेरों का मठ, खमनोर की पहाड़ियाँ (राजसमंद) | रामेश्वरम (खंडार, सवाई माधोपुर) में चम्बल में — त्रिवेणी संगम | राजसमंद, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, अजमेर, टोंक, सवाई माधोपुर |
| बेड़च (आयड़)बनास की सहायक | गोगुंदा की पहाड़ियाँ (उदयपुर) | बीगोद (भीलवाड़ा) के पास बनास में | उदयपुर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा |
| कोठारीबनास की सहायक | दिवेर की पहाड़ियाँ (राजसमंद) | नंदराय (कोटड़ी, भीलवाड़ा) में बनास में | राजसमंद, भीलवाड़ा |
| खारीबनास की सहायक | बीजराल गाँव की पहाड़ियाँ (राजसमंद) | राजमहल (टोंक) में बनास में | राजसमंद, भीलवाड़ा, ब्यावर, अजमेर, टोंक |
| डाईबनास की सहायक | किशनगढ़ की पहाड़ी (अजमेर) | राजमहल (टोंक) में बनास में | अजमेर, टोंक |
| बांडी (बनास की)बनास की सहायक | सामोद व आमलोद की पहाड़ियाँ (जयपुर) | देवधाम (टोंक) के पास बनास में | जयपुर, टोंक |
| मोरेलबनास की सहायक | चैनपुरा गाँव की पहाड़ी (बस्सी, जयपुर) | खंडार (सवाई माधोपुर) में बनास में | जयपुर, दौसा, सवाई माधोपुर |
| बाणगंगा | बैराठ की पहाड़ियाँ (कोटपूतली-बहरोड़) | पहले फतेहाबाद (आगरा) में यमुना में मिलती थी; अब भरतपुर के मैदान में ही लुप्त हो जाती है | कोटपूतली-बहरोड़, जयपुर, दौसा, भरतपुर |
| गम्भीर | नादौती की पहाड़ियाँ (करौली) | रीठई गाँव (आगरा, उत्तर प्रदेश) में यमुना में | करौली, सवाई माधोपुर, धौलपुर, भरतपुर |
| नदी | उद्गम | समापन / मिलन | बहाव के ज़िले |
|---|---|---|---|
| माही | मेहद झील (मिंडा के पास, धार ज़िला, मध्य प्रदेश) | गुजरात में होकर खंभात की खाड़ी में | बाँसवाड़ा, प्रतापगढ़, डूँगरपुर |
| सोममाही की सहायक | बीछामेड़ा की पहाड़ियाँ (ऋषभदेव, उदयपुर) | बेणेश्वर (डूँगरपुर) में माही में | उदयपुर, सलूम्बर, डूँगरपुर |
| जाखमसोम की सहायक | भंवरमाता की पहाड़ी (छोटी सादड़ी, प्रतापगढ़) | बेणेश्वर से थोड़ा पहले लोरावल-बिलूरा के पास सोम में | प्रतापगढ़, सलूम्बर, डूँगरपुर |
| साबरमती | पदराला की पहाड़ियाँ (उदयपुर) | गुजरात में होकर खंभात की खाड़ी में | उदयपुर |
| वाकलसाबरमती की सहायक | गोरा गाँव की पहाड़ियाँ (गोगुंदा, उदयपुर) | मऊ पीपली से गुजरात में जाकर साबरमती में | उदयपुर |
| पश्चिमी बनास | सनवारा की पहाड़ियाँ (सिरोही) | गुजरात (बनासकांठा) में जाकर कच्छ के रन में लुप्त | सिरोही |
| लूनी | नाग पहाड़, आनासागर (अजमेर) | कच्छ का रन में लुप्त | अजमेर, नागौर, ब्यावर, जोधपुर, बालोतरा, बाड़मेर, जालौर |
| जोजड़ीलूनी की सहायक | पुंदलु गाँव (नागौर) | खेजड़ली खुर्द (जोधपुर) के पास लूनी में | नागौर, जोधपुर |
| बांडी (लूनी की)लूनी की सहायक | फुलाद गाँव की पहाड़ियाँ (पाली) | लाखर थम्ब गाँव (पाली–जोधपुर सीमा) के पास लूनी में | पाली |
| सुकड़ीलूनी की सहायक | अरावली का पश्चिमी ढाल, देसूरी के पास (पाली) | समदड़ी (बालोतरा) से थोड़ा पहले लूनी में | पाली, जालौर, बालोतरा |
| जवाईलूनी की सहायक | गोरिया गाँव (बाली, पाली) | हेमागूढ़ा (जालौर) के पास लूनी में — लूनी की सबसे बड़ी सहायक | पाली, सिरोही, जालौर, बाड़मेर |
| नदी | उद्गम | समापन / मिलन | बहाव के ज़िले |
|---|---|---|---|
| घग्घर | शिवालिक श्रेणी — कालका माता मंदिर (शिमला, हिमाचल प्रदेश) | कम वर्षा में भटनेर (हनुमानगढ़) के मैदान में लुप्त; अधिक वर्षा में सूरतगढ़, अनूपगढ़ और पाकिस्तान में फ़ोर्ट अब्बास तक | हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर |
| कांतली | खंडेला की पहाड़ियाँ (सीकर) | चूरू–झुंझुनूँ सीमा पर लुप्त | सीकर, झुंझुनूँ |
| काकनी | कोटरी गाँव की पहाड़ियाँ (जैसलमेर) | कम वर्षा में बूझ झील (रूपसी, जैसलमेर) बनाती है; अधिक वर्षा में मीठा खाड़ी में लुप्त | जैसलमेर |
| साबी (साहिबी) | सेवर की पहाड़ियाँ (शाहपुरा, जयपुर) | हरियाणा में पटौदी के पास लुप्त | जयपुर, कोटपूतली-बहरोड़, खैरथल-तिजारा |
| रूपारेल | उदयनाथ पहाड़ी (थानागाजी, अलवर) | कुशलपुर गाँव (भरतपुर) में लुप्त | अलवर, भरतपुर |
| रूपनगढ़ | किशनगढ़ की पहाड़ियाँ (अजमेर) | दक्षिण दिशा से सांभर झील में | अजमेर, जयपुर |
| मेंढा | मनोहरपुरा (जयपुर) | उत्तर दिशा से सांभर झील में | जयपुर, डीडवाना-कुचामन |
नक्शे पर जो निशान दिखते हैं, उनकी सूची — नदी और एक ख़ास बात के साथ।
राजस्थान में तीन अपवाह तंत्र हैं: बंगाल की खाड़ी तंत्र (लगभग 24% क्षेत्र), अरब सागर तंत्र (लगभग 16%) और आंतरिक प्रवाह तंत्र (लगभग 60%)। अरावली पर्वतमाला इन तंत्रों को बाँटने वाली मुख्य जल-विभाजक रेखा का काम करती है।
चम्बल। यह पूरे साल बहती है, राजस्थान में चित्तौड़गढ़, कोटा, बूँदी, सवाई माधोपुर, करौली और धौलपुर से गुज़रती है और उत्तर प्रदेश में यमुना में मिल जाती है। इसके अलावा राज्य में कोई और बारहमासी नदी नहीं है।
कुल लम्बाई में चम्बल सबसे लम्बी है (1051 किमी), पर उसका केवल 322 किमी हिस्सा राजस्थान में है। राजस्थान के भीतर बहाव की लम्बाई में लूनी (330 किमी) आगे है, और पूरी तरह राजस्थान में बहने वाली सबसे लम्बी नदी बनास (512 किमी) है।
घग्घर, कांतली, काकनी, साबी, रूपारेल, रूपनगढ़ और मेंढा प्रमुख हैं। ये नदियाँ किसी समुद्र तक नहीं पहुँचतीं और रेत, झील या मैदान में ही लुप्त हो जाती हैं। राजस्थान में मरुस्थल का विस्तार सबसे अधिक होने से देश में सबसे ज़्यादा अंतःप्रवाही नदियाँ यहीं हैं।
माही मध्य प्रदेश के धार ज़िले से निकलकर बाँसवाड़ा के रास्ते राजस्थान में आती है, उलटे "U" के आकार में बहकर गुजरात चली जाती है और खंभात की खाड़ी में गिरती है। यह राज्य की इकलौती नदी है जिसका प्रवेश और निकास दोनों दक्षिण से है और जो कर्क रेखा को दो बार काटती है।
यह मानचित्र सीखने के लिए बनाया गया है, नापने के लिए नहीं। हर नदी कुछ ही बिंदुओं से खींची गई है, ताकि आप जल्दी देख सकें कि नदी कहाँ से निकलती है, किस दिशा में बहती है, किन ज़िलों से गुज़रती है और कहाँ मिलती या लुप्त होती है। रेखाओं का रास्ता लगभग है, पर उद्गम, संगम और ज़िलों की जानकारी नोट्स के अनुसार है।
ऊपर तीनों तंत्र के बटन से एक-एक तंत्र चुनें, फिर किसी नदी या बाँध के निशान पर टैप करें — नीचे उसका कार्ड खुल जाएगा। "नदियों की सैर" दबाने पर मानचित्र अपने आप एक-एक मुख्य नदी पर ले जाता है। नदी के नाम छुपाकर आप ख़ुद को परख भी सकते हैं।
अपवाह तंत्र का पूरा अध्याय — हर नदी, बाँध, संगम और ज़िलेवार नदियाँ — भूगोल के नोट्स में है। ज़िलों का नक्शा अभ्यास के लिए राजस्थान मानचित्र पर देखें।
पूरे राजस्थान GK नोट्स देखेंशुभ दीपावली
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