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मौर्योत्तर काल - Short Trick

शुंग, कण्व, सातवाहन, यूनानी, शक, कुषाण, विद्वान और कला — एक-एक वाक्य में

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कैसे पढ़ें
  • गुरु राम हर रंगीन शब्द = सूची का एक नाम, उसी रंग का नाम नीचे
  • मछली एक शब्द में दो रंग = दो नाम
  • ➜ क्रम नंबर वाला क्रम ज़रूरी है · ⇄ क्रम कोई भी क्रम नहीं
1

शुंग, कण्व और खारवेल

मगध में वंशों का क्रम, किसने किसका अन्त किया, कण्व राजा, और शुंग-चेदि की ख़ास बातें।

ट्रिक 1

मगध के वंश

➜ क्रम से

मौसी शुगर कम और सादा खाना खाती हैं।

  1. 1मौर्य
  2. 2शुंगलगभग 185–73 ई.पू. · राजधानियाँ पाटलिपुत्र और विदिशा
  3. 3कण्व (कण्वायन)लगभग 45 वर्ष · केवल चार राजा
  4. 4सातवाहन (आन्ध्रभृत्य)
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अन्तिम राजा — किसने अन्त किया

3 वाक्य

बृहस्पतिवार को पुष्पा सेनापति बनी।

बृहद्रथ (अन्तिम मौर्य)=सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने हत्या की (लगभग 185 ई.पू.) — शुंग वंश

देवर की जगह वासु मंत्री बना।

देवभूति (अन्तिम शुंग)=ब्राह्मण मंत्री वासुदेव ने हत्या की (लगभग 73 ई.पू.) — कण्व वंश (बाण के अनुसार)

सुषमा की कुर्सी आँधी ले गई।

सुशर्मा (अन्तिम कण्व)=आन्ध्रभृत्यों (सातवाहनों) ने कण्व वंश का अन्त किया (पुराण)

क्रम याद रखें: सेनापति → मंत्री → आन्ध्र।

ट्रिक 2

कण्व वंश के चार राजा

➜ क्रम से

वासु भूमि पर नारियल सुखाता है।

  1. 1वासुदेवसंस्थापक
  2. 2भूमिमित्र
  3. 3नारायणभूमिमित्र का पुत्र
  4. 4सुशर्मानारायण का पुत्र · अन्तिम
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शुंग और चेदि — ख़ास बातें

3 वाक्य

पुष्पा ने दो घोड़े दौड़ाए।

पुष्यमित्र शुंग=दो अश्वमेध यज्ञ — धनदेव का अयोध्या अभिलेख · पतंजलि (महाभाष्य) समकालीन

भाग्य से हेलीकॉप्टर विदिशा में उतरा।

भागभद्र (शुंग)=उसके दरबार में अंतिअलकिदस का दूत हेलियोडोरस — विदिशा (बेसनगर) में वासुदेव के सम्मान में गरुड़ध्वज स्तम्भ

खारा पानी हाथी की गुफा में

खारवेल (कलिंग, चेदि)=हाथीगुम्फा अभिलेख — उदयगिरि (भुवनेश्वर के पास), प्राकृत भाषा, ब्राह्मी लिपि · जैन धर्म का संरक्षक

शुंग काल में साँची स्तूप की मरम्मत-विस्तार और भरहुत स्तूप पूरा हुआ · खारवेल की राजधानी कलिंगनगर।

2

सातवाहन

प्रमुख सातवाहन राजा क्रम से, और हर राजा की पहचान।

3

यूनानी, शक और पह्लव

उत्तर-पश्चिम से आए आक्रमणकारियों का क्रम और हर एक की पहचान।

4

कुषाण

कुषाण राजाओं का क्रम और हर राजा की पहचान।

5

विद्वान और रचनाएँ

मौर्योत्तर युग के विद्वान और उनकी रचनाएँ।

6

कला की तीन शैलियाँ

गांधार, मथुरा और अमरावती शैली — सामग्री और पहचान।

इस अध्याय के पूरे नोट्स के लिए मूल अध्याय पढ़ें — ट्रिक सूची याद कराती है, समझ नोट्स से आती है।