अनुच्छेद — विषय
7 वाक्यअधिकारी पाँच साल से यहीं रहता है।
अधिवास वाले व्यक्ति (संविधान लागू होते समय)=अनु. 5 — भारत में अधिवास, और भारत में जन्म, या माता/पिता भारत में जन्मे, या 26 जनवरी 1950 से ठीक पहले कम से कम 5 वर्ष भारत का सामान्य निवासी
पापा छह महीने के लिए आए।
पाकिस्तान से भारत आए प्रवासी=अनु. 6 — 19 जुलाई 1948 से पहले आए तो आने के बाद से सामान्य निवासी होना काफ़ी · उस दिन या बाद आए तो भारत में 6 माह रहकर पंजीकरण
पापा गए और सात दिन में लौट आए।
पाकिस्तान जाकर लौटे लोग=अनु. 7 — 1 मार्च 1947 के बाद पाकिस्तान गए · लौटे तो केवल पुनर्वास परमिट पर (1948 के बाद के प्रवासी की तरह माने गए)
विदेश से आठ चिट्ठियाँ आईं।
विदेश में रहने वाले भारतीय मूल के लोग=अनु. 8 — स्वयं, माता-पिता या दादा-दादी/नाना-नानी अविभाजित भारत में जन्मे · भारत के राजनयिक या कांसुलर कार्यालय में पंजीकरण
नौ बजे दूसरा पासपोर्ट मिला।
दूसरे देश की नागरिकता अपनी इच्छा से ली=अनु. 9 — स्वेच्छा से विदेशी नागरिकता लेते ही भारतीय नागरिकता समाप्त
बनी रहे दस साल की दोस्ती।
बने रहना — नागरिकता जारी रहना=अनु. 10 — हर नागरिक नागरिक बना रहेगा, पर संसद के क़ानून के अधीन
संसद में ग्यारह बजे बहस हुई।
संसद की शक्ति=अनु. 11 — नागरिकता पाने-खोने पर क़ानून बनाने की पूरी शक्ति संसद को · इसी से नागरिकता अधिनियम, 1955 बना
भाग 2, अनु. 5–11 · एकल नागरिकता (केवल संघ की) — विचार ब्रिटेन से · अनु. 5–8 बताते हैं कि पहले दिन कौन नागरिक था, बाक़ी सब संसद पर (अनु. 11) · अनु. 5–9 तो 26 नवंबर 1949 को ही लागू हो गए थे (अनु. 394)।