संत — रचना
6 वाक्यजामुन सागर में
जाम्भोजी=जम्भसागर, जम्भसंहिता ("पाँचवाँ वेद"), 120 शब्द वाणियाँ
सिंघाड़ा जश्न में
सिंभूधड़ा=जसनाथजी · कोंडा ग्रन्थ भी · यशोनाथ पुराण — सिद्ध रामनाथ
हरि का मंत्र
हरिदास महाराज (निरंजनी)=मंत्र राजप्रकाश, हरिपुरुष जी की वाणी
दादा की काया
दादू दयाल=कायाबेलि, दादूजी री वाणी
अंगूठी रज्जब ने पहनाई।
अंगवधू=रज्जब जी — दादू की वाणी, 276 पद · रजब वाणी, सर्वंगी
राघव की माला
राघवदास=भक्तमाल
हरड़ेवाणी (189 पद) — संतदास और जगन्नाथदास · सुन्दरदास — ज्ञान समुद्र, सुन्दर विलास · लालदास — चेतावण्या, नाममाला · दया बाई — दयाबोध, सहजो बाई — सहज प्रकाश · नाथ बनानाथ — अनुभव प्रकास, परवाना।