- समास के कितने भेद माने जाते हैं?
- चार
- पाँच
- छह
- सात
उत्तर देखें
उत्तर: (C) छह
अव्ययीभाव, तत्पुरुष, कर्मधारय, द्विगु, द्वंद्व और बहुव्रीहि।
- अव्ययीभाव समास में कौन-सा पद प्रधान होता है?
- पूर्वपद
- उत्तरपद
- दोनों पद
- कोई अन्य पद
उत्तर देखें
उत्तर: (A) पूर्वपद
अव्ययीभाव में पहला (अव्यय) पद प्रधान है।
- द्वंद्व समास में कौन-सा पद प्रधान होता है?
- पूर्वपद
- उत्तरपद
- दोनों पद
- कोई तीसरा पद
उत्तर देखें
उत्तर: (C) दोनों पद
दोनों पद समान रूप से प्रधान होते हैं।
- बहुव्रीहि समास में प्रधान क्या होता है?
- पूर्वपद
- उत्तरपद
- दोनों पद
- अन्य अर्थ
उत्तर देखें
उत्तर: (D) अन्य अर्थ
दोनों पद गौण रहते हैं; तीसरा अर्थ प्रधान।
- "यथाशक्ति" में समास है —
- अव्ययीभाव
- तत्पुरुष
- कर्मधारय
- द्विगु
उत्तर देखें
उत्तर: (A) अव्ययीभाव
यथा (अव्यय) + शक्ति — शक्ति के अनुसार।
- "आजीवन" का विग्रह है —
- जीवन के लिए
- जीवन में
- जीवन भर
- जीवन से
उत्तर देखें
उत्तर: (C) जीवन भर
आ = तक — जीवन भर। अव्ययीभाव।
- "रेखांकित" में समास है —
- कर्म तत्पुरुष
- करण तत्पुरुष
- संबंध तत्पुरुष
- अधिकरण तत्पुरुष
उत्तर देखें
उत्तर: (B) करण तत्पुरुष
रेखा से अंकित — करण (से)।
- "रसोईघर" में समास है —
- संप्रदान तत्पुरुष
- अपादान तत्पुरुष
- संबंध तत्पुरुष
- कर्म तत्पुरुष
उत्तर देखें
उत्तर: (A) संप्रदान तत्पुरुष
रसोई के लिए घर — संप्रदान।
- "ऋणमुक्त" का विग्रह है —
- ऋण का मुक्त
- ऋण से मुक्त
- ऋण में मुक्त
- ऋण को मुक्त
उत्तर देखें
उत्तर: (B) ऋण से मुक्त
ऋण से अलग होना — अपादान तत्पुरुष।
- "राजपुत्र" का विग्रह और समास —
- राजा का पुत्र, संबंध तत्पुरुष
- राजा से पुत्र, करण तत्पुरुष
- राजा के लिए पुत्र, संप्रदान
- राजा में पुत्र, अधिकरण
उत्तर देखें
उत्तर: (A) राजा का पुत्र, संबंध तत्पुरुष
का चिह्न — संबंध तत्पुरुष।
- "जलमग्न" में समास है —
- संबंध तत्पुरुष
- अधिकरण तत्पुरुष
- अपादान तत्पुरुष
- द्वंद्व
उत्तर देखें
उत्तर: (B) अधिकरण तत्पुरुष
जल में मग्न — सप्तमी, अधिकरण।
- "अधर्म" में समास है —
- नञ् तत्पुरुष
- कर्मधारय
- बहुव्रीहि
- द्विगु
उत्तर देखें
उत्तर: (A) नञ् तत्पुरुष
न धर्म — नञ् तत्पुरुष।
- "कुंभकार" में समास है —
- उपपद तत्पुरुष
- कर्मधारय
- द्वंद्व
- अव्ययीभाव
उत्तर देखें
उत्तर: (A) उपपद तत्पुरुष
कुंभ बनाने वाला — उत्तरपद कृदंत।
- "नीलगगन" में समास है —
- द्विगु
- कर्मधारय
- बहुव्रीहि
- द्वंद्व
उत्तर देखें
उत्तर: (B) कर्मधारय
नीला है जो गगन — विशेषण-विशेष्य।
- "घनश्याम" का विग्रह है —
- घन के समान श्याम
- घन और श्याम
- घन का श्याम
- घन में श्याम
उत्तर देखें
उत्तर: (A) घन के समान श्याम
घन जैसा श्याम — उपमान पूर्व कर्मधारय।
- "चरणकमल" में समास है —
- तत्पुरुष
- द्वंद्व
- कर्मधारय
- बहुव्रीहि
उत्तर देखें
उत्तर: (C) कर्मधारय
चरण रूपी कमल — रूपक कर्मधारय।
- "सप्ताह" में समास है —
- द्वंद्व
- द्विगु
- बहुव्रीहि
- कर्मधारय
उत्तर देखें
उत्तर: (B) द्विगु
सात दिनों का समूह।
- "चौराहा" का विग्रह है —
- चार राहों का समूह
- चार हैं राहें जिसमें
- चार और राह
- चार जैसी राह
उत्तर देखें
उत्तर: (A) चार राहों का समूह
संख्या + समूह — द्विगु।
- "माता-पिता" में समास है —
- द्विगु
- कर्मधारय
- द्वंद्व
- बहुव्रीहि
उत्तर देखें
उत्तर: (C) द्वंद्व
माता और पिता — इतरेतर द्वंद्व।
- "दाल-रोटी" में द्वंद्व का भेद है —
- इतरेतर
- समाहार
- वैकल्पिक
- कोई नहीं
उत्तर देखें
उत्तर: (B) समाहार
दाल, रोटी आदि — समाहार।
- "लाभ-हानि" में द्वंद्व का भेद है —
- इतरेतर
- समाहार
- वैकल्पिक
- कोई नहीं
उत्तर देखें
उत्तर: (C) वैकल्पिक
लाभ या हानि — वैकल्पिक।
- "नीलकंठ" (शिव) में समास है —
- कर्मधारय
- द्विगु
- बहुव्रीहि
- तत्पुरुष
उत्तर देखें
उत्तर: (C) बहुव्रीहि
नीला है कंठ जिसका — अन्य अर्थ प्रधान।
- "गजानन" का विग्रह है —
- गज और आनन
- गज जैसा आनन है जिसका
- गज का आनन
- गज में आनन
उत्तर देखें
उत्तर: (B) गज जैसा आनन है जिसका
यह गणेश का नाम है — बहुव्रीहि।
- "निर्धन" में समास है —
- नञ् तत्पुरुष
- बहुव्रीहि
- द्विगु
- कर्मधारय
उत्तर देखें
उत्तर: (B) बहुव्रीहि
नहीं है धन जिसके पास — अन्य अर्थ (गरीब)।
- "पीतांबर" का बहुव्रीहि विग्रह है —
- पीला अंबर
- पीला और अंबर
- पीला है अंबर जिसका
- पीले का अंबर
उत्तर देखें
उत्तर: (C) पीला है अंबर जिसका
यह कृष्ण का नाम बनता है। "पीला अंबर" कर्मधारय विग्रह है।
- "त्रिलोचन" में समास है —
- द्विगु
- बहुव्रीहि
- कर्मधारय
- द्वंद्व
उत्तर देखें
उत्तर: (B) बहुव्रीहि
तीन हैं लोचन जिसके — शिव।
- "त्रिलोक" में समास है —
- द्विगु
- बहुव्रीहि
- कर्मधारय
- द्वंद्व
उत्तर देखें
उत्तर: (A) द्विगु
तीन लोकों का समूह।
- तत्पुरुष समास का विग्रह जाँचने के लिए क्या लगाते हैं?
- जिसके
- विभक्ति-चिह्न (को, से, का…)
- और / या
- है जो
उत्तर देखें
उत्तर: (B) विभक्ति-चिह्न (को, से, का…)
पूर्वपद के बाद छिपी विभक्ति ढूँढ़ने पर तत्पुरुष पहचाना जाता है।
- "चक्र है पाणि में जिसके" का सामासिक पद है —
- चक्रपाणि
- चक्रधर
- चक्राणि
- पाणिचक्र
उत्तर देखें
उत्तर: (A) चक्रपाणि
बहुव्रीहि — चक्रपाणि (विष्णु)।
- तद्भव पूर्वपद का बदला रूप कौन-सा सही है?
- हाथकड़ी
- हथकड़ी
- हातकड़ी
- हाथ्कड़ी
उत्तर देखें
उत्तर: (B) हथकड़ी
हाथ → हथ।
- द्वंद्व समास में बीच में लगाया जाने वाला चिह्न है —
- योजक चिह्न (-)
- अल्पविराम (,)
- पूर्णविराम (।)
- कोष्ठक
उत्तर देखें
उत्तर: (A) योजक चिह्न (-)
माता-पिता, दाल-रोटी जैसे शब्दों में योजक चिह्न ज़रूरी।
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