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राजस्थान के प्रमुख लोक नाट्य — GK Questions in Hindi (प्रश्न उत्तर)

14 प्रश्न
  1. राजस्थान का प्रसिद्ध लोक रंगमंच कौन-सा है? (पशु परिचर, 2024)
    1. जात्रा
    2. दशावतार
    3. भवाई
    4. स्वांग
    उत्तर देखें

    उत्तर: (C) भवाई

    भवाई राजस्थान का प्रसिद्ध लोक रंगमंच है; जात्रा बंगाल की और दशावतार कोंकण-महाराष्ट्र की परम्परा है।

  2. किस लोक नाट्य शैली में कलाकार को बहरूपिया कहा जाता है? (पशु परिचर, 2024)
    1. गवरी
    2. तमाशा
    3. स्वांग
    4. रामावत
    उत्तर देखें

    उत्तर: (C) स्वांग

    स्वांग रचने वाले को बहरूपिया कहते हैं; जानकीलाल भांड (भीलवाड़ा) इसके प्रसिद्ध कलाकार हैं।

  3. खुली कॉलोनी या बाज़ार के प्रांगण में किस लोक नाट्य का मंचन होता है? (पशु परिचर, 2024)
    1. रम्मत
    2. गवरी
    3. स्वांग
    4. तमाशा
    उत्तर देखें

    उत्तर: (A) रम्मत

    रम्मत की रंगभूमि मोहल्ले या मंडी का खुला चौक है; बीकानेर में काठ के पाटे लगते हैं।

  4. कुचामनी ख्याल की शुरुआत किस लोक नाट्यकार ने की? (स्टेनोग्राफ़र, 2024; सुप्रिटेंडेंट गार्डन, 2021)
    1. लाला राम
    2. लच्छी राम
    3. नानू राम
    4. राजा राम
    उत्तर देखें

    उत्तर: (B) लच्छी राम

    लच्छीराम — चाँद नीलगिरी, राव रिड़मल, मीरा मंगल उनकी रचनाएँ।

  5. जयपुर का प्रसिद्ध लोक नाट्य कौन-सा है? (पशु परिचर, 2024)
    1. कन्हैया ख्याल
    2. तमाशा
    3. रम्मत
    4. चारबैत
    उत्तर देखें

    उत्तर: (B) तमाशा

    तमाशा — जयपुर, बंशीधर भट्ट, भट्ट परिवार।

  6. "चारबैत" राजस्थान के किस क्षेत्र का प्रसिद्ध लोक नाट्य है? (VDO 2022; जेल प्रहरी 2017; REET मुख्य 2023)
    1. जयपुर
    2. टोंक
    3. बीकानेर
    4. भीलवाड़ा
    उत्तर देखें

    उत्तर: (B) टोंक

    टोंक — नवाब फ़ैजुल्ला के समय, करीम खाँ निहंग; मूल अफ़गानिस्तान।

  7. किस ख्याल का मुख्य पात्र "मेड़िया" कहलाता है? (स्टेनोग्राफ़र, 2024)
    1. तुर्रा कलंगी
    2. जयपुरी
    3. हेला
    4. कन्हैया ख्याल
    उत्तर देखें

    उत्तर: (D) कन्हैया ख्याल

    कन्हैया ख्याल — मुख्य कथा "कहन"; दिन में खेला जाता है।

  8. तमाशा नामक लोक नाट्य किसके शासनकाल में शुरू हुआ? (CET स्नातक, 2024)
    1. महाराजा प्रताप सिंह
    2. महाराजा रामसिंह
    3. महाराजा मानसिंह
    4. महाराजा जयसिंह
    उत्तर देखें

    उत्तर: (A) महाराजा प्रताप सिंह

    सवाई प्रतापसिंह के समय; रामसिंह द्वितीय ने कलाकारों को प्रश्रय दिया।

  9. कुचामनी ख्याल के बारे में — (A) लच्छीराम ने शुरू किया, (B) चाँद नीलगिरी, राव रिड़मल, मीरा मंगल उनकी रचनाएँ, (C) यह खुली नहीं, बंद नाट्यशाला में होता है, (D) ढोल, सारंगी, शहनाई, ढोलक मुख्य सहयोगी — कौन-से सही हैं? (CET स्नातक, 2024)
    1. केवल A, B और D
    2. केवल A और C
    3. केवल B और C
    4. A, B, C और D सभी
    उत्तर देखें

    उत्तर: (A) केवल A, B और D

    कुचामनी ख्याल खुले मंच पर होता है, इसलिए C ग़लत है।

  10. रम्मत के बारे में — (i) एक ही समुदाय के लोग भाग लेते हैं, (ii) टेरिये और गायकों की प्रमुख भूमिका, (iii) पात्र रंगमंच पर बैठे रहकर बारी पर कला दिखाते हैं, (iv) भाषा और क्षेत्रीय रंग इसे एक इलाक़े से जोड़ते हैं — कौन-से सही हैं? (सहायक सांख्यिकी अधिकारी, 2024)
    1. (i), (ii) और (iii)
    2. (ii), (iii) और (iv)
    3. (i) और (iv)
    4. (i), (iii) और (iv)
    उत्तर देखें

    उत्तर: (B) (ii), (iii) और (iv)

    रम्मत में सभी जातियाँ शामिल होती हैं, इसलिए (i) ग़लत है।

  1. लच्छीराम किस लोक नाट्य से जुड़े हैं? (कंप्यूटर GK 2018; LDC 2024; वनरक्षक 2022; लैब असिस्टेंट 2022)
    1. कुचामनी ख्याल
    2. हेला ख्याल
    3. अलीबक्शी ख्याल
    4. जयपुरी ख्याल
    उत्तर देखें

    उत्तर: (A) कुचामनी ख्याल

    कुचामन सिटी का ख्याल।

  2. गवरी नाट्य में शिव का रूप धरने वाले मुख्य पात्र को क्या कहते हैं?
    1. झामट्या
    2. पुरिया / बुढ़िया
    3. खटकड़्या
    4. कुटकुड़िया
    उत्तर देखें

    उत्तर: (B) पुरिया / बुढ़िया

    झामट्या कविता बोलता है, खटकड़्या दोहराता है, कुटकुड़िया सूत्रधार है।

  3. तुर्रा-कलंगी ख्याल में किन दो संत-पीरों का नाम आता है?
    1. शाह अली व तुकनगीर
    2. अलीबक्श व हमीदुल्ला
    3. बाघजी व नानूराम
    4. लच्छीराम व उगमराज
    उत्तर देखें

    उत्तर: (A) शाह अली व तुकनगीर

    तुकनगीर तुर्रा के पक्षधर (शिव), शाह अली कलंगी के (पार्वती); चंदेरी के शासक से भेंट मिली।

  4. राजस्थान की प्रथम पारसी थियेटर की स्थापना कहाँ और कब हुई?
    1. जयपुर, 1878
    2. जोधपुर, 1897
    3. झालावाड़, 1921
    4. बीकानेर, 1930
    उत्तर देखें

    उत्तर: (A) जयपुर, 1878

    रामप्रकाश थियेटर — महाराजा रामसिंह द्वितीय।

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