- सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण (धारा 245(1)) पर साधारण कारावास कितना है?
- 1 माह से 1 वर्ष
- 3 माह से 3 वर्ष
- 6 माह से 5 वर्ष
- 1 से 3 वर्ष
उत्तर देखें
उत्तर: (B) 3 माह से 3 वर्ष
धारा 245(1) — 3 माह से 3 वर्ष, साथ में जुर्माना; विशेष कारण लिखकर अदालत 3 माह से कम भी दे सकती है।
- धारा 245(1) में अतिक्रमण पर जुर्माना कितना है?
- ₹5,000–10,000
- ₹10,000–25,000
- ₹30,000–50,000
- ₹50,000–1 लाख
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उत्तर: (C) ₹30,000–50,000
धारा 245(1) — ₹30,000 से ₹50,000, कारावास के साथ (दोनों)।
- अतिक्रमण में ज़ब्ती/जब्ती के आदेश की अपील किसे और कितने समय में की जाती है?
- कलेक्टर को 30 दिन में
- राज्य सरकार को 60 दिन में
- उच्च न्यायालय को 90 दिन में
- ज़िला न्यायाधीश को 1 माह में
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उत्तर: (D) ज़िला न्यायाधीश को 1 माह में
धारा 245(12) — आदेश की सूचना से 1 माह में उस ज़िले के ज़िला न्यायाधीश को।
- धारा 245(19) के अनुसार अतिक्रमण के अपराध की जाँच किस रैंक से नीचे का अधिकारी नहीं कर सकता?
- सब-इंस्पेक्टर
- इंस्पेक्टर
- उपाधीक्षक (DSP)
- अधीक्षक (SP)
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उत्तर: (C) उपाधीक्षक (DSP)
उपाधीक्षक से नीचे का नहीं; FIR से 3 माह में जाँच पूरी कर रिपोर्ट न्यायालय में दाख़िल करनी होती है।
- नगरपालिका की ओर से FIR दर्ज होने के बाद अतिक्रमण-जाँच कितने समय में पूरी होनी चाहिए?
- 3 माह
- 1 माह
- 6 माह
- 45 दिन
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उत्तर: (A) 3 माह
धारा 245(19) — FIR की तिथि से 3 माह के भीतर।
- धारा 245(20) में संभावित अतिक्रमणकर्ता से अच्छे आचरण का बंधपत्र अधिकतम कितनी अवधि के लिए लिया जा सकता है?
- 6 माह
- 1 वर्ष
- 2 वर्ष
- 3 वर्ष
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उत्तर: (B) 1 वर्ष
मजिस्ट्रेट एक वर्ष तक की अवधि का बंधपत्र ले सकता है; कार्यवाही CMO की आशंका पर।
- धारा 245(16) में सड़क पर ईंधन का ढेर अधिकतम कितने दिन रखने दिया जा सकता है?
- 3 दिन
- 15 दिन
- 7 दिन
- 1 माह
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उत्तर: (C) 7 दिन
त्योहार-समारोह की अस्थायी अनुमति और ईंधन का ढेर 7 दिन से अधिक नहीं।
- अनुमति बिना मूर्ति लगाने (धारा 241(2)) पर दंड क्या है?
- कारावास 1 माह और जुर्माना ₹5,000
- कारावास 3 माह–3 वर्ष और ₹30,000–50,000
- केवल जुर्माना ₹10,000–20,000
- कारावास 2–6 माह और जुर्माना ₹25,000–50,000
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उत्तर: (D) कारावास 2–6 माह और जुर्माना ₹25,000–50,000
धारा 241(2) — साधारण कारावास 2 से 6 माह और जुर्माना ₹25,000 से ₹50,000, दोनों।
- जिस उल्लंघन का दंड अधिनियम में कहीं और नहीं दिया गया, उस पर धारा 291 के अनुसार जुर्माना कितना?
- ₹500 तक
- ₹1,000–2,000
- ₹2,000–5,000
- ₹5,000–10,000
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उत्तर: (C) ₹2,000–5,000
धारा 291 — ₹2,000 से ₹5,000 (2026 में इसे "शास्ति" कहा गया)।
- धारा 287 के अनुसार मालिक की चूक पर नगरपालिका द्वारा करवाए काम का प्रशासनिक शुल्क क्या है?
- 5%, न्यूनतम ₹500
- 10%, न्यूनतम ₹1,000
- 10%, न्यूनतम ₹2,000
- 15%, कोई न्यूनतम नहीं
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उत्तर: (B) 10%, न्यूनतम ₹1,000
ख़र्च का 10%, न्यूनतम ₹1,000; सुधार-व्यय पर 15% वार्षिक ब्याज अलग।
- "सुधार व्यय" (धारा 287(1)(ख)) पर ब्याज की दर क्या है?
- 15% वार्षिक
- 12% वार्षिक
- 10% वार्षिक
- 18% वार्षिक
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उत्तर: (A) 15% वार्षिक
सुधार-व्यय भवन/भूमि पर भार बनता है और 15% वार्षिक ब्याज सहित वसूल होता है।
- क़ब्ज़े में रहने वाले भवन में प्रवेश के लिए धारा 292 के अनुसार क़ब्ज़ेदार को कितने समय का लिखित नोटिस ज़रूरी है?
- 48 घंटे
- 12 घंटे
- 7 दिन
- 24 घंटे
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उत्तर: (D) 24 घंटे
धारा 292 — 24 घंटे का लिखित नोटिस और सहमति; सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच।
- धारा 295 के अनुसार आपसी सहमति न बनने पर मुआवज़ा कौन तय करता है?
- कलेक्टर
- ज़िला न्यायाधीश
- स्थानीय निकाय निदेशक द्वारा नियुक्त/अधिकृत अधिकारी
- मुख्य नगरपालिका अधिकारी
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उत्तर: (C) स्थानीय निकाय निदेशक द्वारा नियुक्त/अधिकृत अधिकारी
धारा 295(1); पीड़ित पक्ष दीवानी न्यायालय भी जा सकता है।
- 2026 के जन विश्वास अधिनियम का नगरपालिका अधिनियम के अध्याय 12 पर क्या असर हुआ?
- सभी जुर्माने समाप्त
- कुछ धाराओं में दोषसिद्धि पर जुर्माने की जगह शास्ति
- अतिक्रमण का कारावास समाप्त
- सभी कारावास समाप्त
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उत्तर: (B) कुछ धाराओं में दोषसिद्धि पर जुर्माने की जगह शास्ति
अध्याय 12 की 12 धाराओं में जुर्माना → शास्ति; राशियाँ वही; अतिक्रमण का कारावास अछूता।
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