त्रिकोणमिति: सरलीकरण, θ का विलोपन और रेडियन
प्रतियोगी गणित · SSC CGL
यह त्रिकोणमिति का चौथा और अंतिम अध्याय है। पहले तीन अध्यायों में अनुपात और सर्वसमिकाएँ, चतुर्थांश और पूरक कोण, और द्विकोण सूत्र आ चुके हैं; यहाँ हम उन्हें काम में लगाते हैं: कठिन दिखने वाले व्यंजक को छोटा करना, दो समीकरणों से को हटाना, और कोणों को रेडियन में नापना।
| भाग | क्या सीखेंगे | SSC में कैसे आता है |
|---|---|---|
| मान रखना और रूपांतरण | एक आसान कोण रखकर विकल्प जाँचना; वर्गमूल के भीतर वर्गमूल; मानना | “सरल कीजिए”, “मान ज्ञात कीजिए” (विकल्पों के साथ) |
| का विलोपन | दो समीकरणों से और का संबंध | “ विलोपित कीजिए” |
| एक ही अनुपात में लिखना | सब कुछ में, या में | “ हो तो मान”, “सिद्ध कीजिए” |
| रेडियन और चाप | अंश ↔ रेडियन, , त्रिज्यखंड, पहिए और पट्टे | “रेडियन में बदलिए”, “चाप की लंबाई” |
| घड़ी के कोण | सुइयों की चाल, कोण, और सुइयाँ कब मिलेंगी | “3:40 बजे दोनों सुइयों के बीच कोण” |
- कोई भी (नुकीला) कोण, जिन पर यह व्यंजक परिभाषित हो
- का दुगुना कोण
मान रखना और रूपांतरण
विकल्प जाँचने के लिए कोण रखना, वर्गमूलों को खोलना और sin + cos को x मानकर सरल करना।
मान रखकर विकल्प जाँचना
एक आसान कोण रखकर विकल्प छाँटना, कोण कैसे चुनें, और तीन स्थितियाँ जहाँ यह तरीका ग़लत उत्तर दे सकता है।
अगर कोई सर्वसमिका हर कोण के लिए सच है तो वह हमारे चुने हुए एक कोण के लिए भी सच है। इसलिए बीजगणित से सरल करने के बजाय हम एक आसान कोण चुनते हैं, दिए व्यंजक का मान निकालते हैं, हर विकल्प का मान उसी कोण पर निकालते हैं और जो विकल्प मेल खाए वही उत्तर है। इसे मान रखना कहते हैं, और विकल्पों वाले प्रश्नों में यह मिनटों का काम सेकंडों में कर देता है।
कोण चुनने का नियम सीधा है: जो फलन प्रश्न में दिखें उनके मान आसान हों। नीचे की तालिका से चुनिए, और ध्यान रखिए कि जिस फलन का मान उस कोण पर अपरिभाषित है (जैसे ) या जिससे कोई हर शून्य बन जाए, वह कोण कभी न रखें।
| प्रश्न में है | पहले आज़माइए | मत रखिए |
|---|---|---|
| केवल और | , | जो हर को शून्य बना दे |
| भी है | , फिर | |
| या है | , , | |
| है | , , | |
| , जैसे कोण | , | जहाँ पर या अपरिभाषित हो |
तीन स्थितियाँ जहाँ एक कोण काफ़ी नहीं है: (1) दो या अधिक विकल्प उसी मान पर मेल खाते हैं, जैसे पर और ; तब दूसरा कोण भी रखिए ( सबसे अच्छा साथी है क्योंकि वहाँ )। (2) हर शून्य या बन जाए; तब कोण बदलिए। (3) प्रश्न में “सिद्ध कीजिए” हो या विकल्प न हों; तब एक संख्या प्रमाण नहीं है, बीजगणित से ही दिखाना पड़ेगा।
- विकल्पों को देखिए: वे किन फलनों से बने हैं? उसी से कोण चुनिए (ऊपर की तालिका)।
- जाँचिए कि चुने कोण पर प्रश्न या किसी विकल्प में कोई फलन अपरिभाषित या हर शून्य तो नहीं।
- दिए व्यंजक का पूरा सटीक मान (, आदि) निकालिए; दशमलव में मत जाइए।
- हर विकल्प का मान उसी कोण पर निकालिए और मिलान कीजिए।
- अगर एक से अधिक विकल्प मेल खाएँ तो दूसरा कोण रखकर फिर छाँटिए। केवल एक बचे तो वही उत्तर।
- 1इसमें और हैं, इसलिए नहीं रख सकते ( अपरिभाषित है)। रखते हैं: , , ।
- 2व्यंजक का मान: ।
- 3विकल्प पर: ✓, ✓, ✗, ✗। दो विकल्प (A) और (B) मेल खा गए, इसलिए एक कोण काफ़ी नहीं है।
- 4अब : , , । व्यंजक । ✓ जबकि ✗।
- 1केवल है, इसलिए मना है। सबसे आसान : व्यंजक ।
- 2विकल्प पर: ✗, ✓, ✓, ✗। (B) और (C) दोनों मेल खाए, इसलिए दूसरा कोण चाहिए।
- 3: , इसलिए व्यंजक ।
- 4(B) ✓। (C) ✗। इसलिए उत्तर (B)।
- 1 मत रखिए: दिए व्यंजक का हर हो जाता है। आज़माते हैं: व्यंजक ।
- 2विकल्प पर: (A) ✓, (B) ✓, (C) ✗, (D) ✓। तीन विकल्प बच गए, इसलिए ने ज़्यादा काम नहीं किया।
- 3: व्यंजक ।
- 4(A) ✓। (B) ✗। (D) ✗। केवल (A) बचा।
वर्गमूल के भीतर वर्गमूल
द्विकोण सूत्रों से हर परत को पूर्ण वर्ग बनाकर वर्गमूल हटाना, और कोण की सीमा से चिह्न तय करना।
एक वर्गमूल तभी हटता है जब उसके भीतर पूर्ण वर्ग हो। त्रिकोणमिति हमें पूर्ण वर्ग बनाने के चार साधन देती है, सब द्विकोण सूत्र से निकले: , , और (क्योंकि और )।
- दुगुना कोण; भीतर या दिखे तो ये सूत्र लगाइए
- मापांक: , हमेशा धनात्मक; चिह्न कोण की सीमा से तय होता है
- सबसे भीतर के वर्गमूल को ढूँढिए और उसके अंदर का व्यंजक देखिए।
- उसे या के रूप में लिखिए ( को से या को बाहर निकालकर)।
- वर्गमूल लीजिए। कोण की सीमा देखकर चिह्न तय कीजिए (मापांक)।
- जो मिला उसे अगली परत में रखकर वही क्रिया दोहराइए, जब तक सारे वर्गमूल न हट जाएँ।
- एक कोण ( या ) रखकर जाँच लीजिए।
- 1 है, इसलिए ।
- 2वर्गमूल: (नुकीले कोण पर )।
- 3अब ।
- 1सबसे भीतर: ।
- 2उसका वर्गमूल । यहाँ है, इसलिए और मूल ।
- 3बाहर की परत: (सूत्र में )।
- 4इसका वर्गमूल ( इसलिए )।
- 1, इसलिए मूल ।
- 2 पर (क्योंकि के बाद बड़ा हो जाता है), इसलिए और मापांक हटाने पर ही आएगा।
- 3सीधे: , मूल । दूसरी ओर ✓।
मानना
को मानकर बाकी सब में लिखना, वाले गुणनफल, और की शृंखला।
जब किसी व्यंजक में (या ) बार-बार आए, तो उसे एक नाम दे दीजिए और बाकी सब कुछ में लिखिए। कुंजी एक वर्ग है: । यानी गुणनफल योग से बँधा है।
- (दिया हुआ योग)
- दोनों का गुणनफल, जो से निकलता है
- अंतर का वर्ग;
| चाहिए | में रूप | कारण |
|---|---|---|
तालिका के अक्षर: (दिया योग)। हर पंक्ति का कारण वाला स्तंभ बताता है कि वह रूप से कैसे बना।
दूसरी चाल: । जिस गुणनफल के दो कोष्ठक एक ही के साथ और जोड़ें, वह बन जाता है। उदाहरण: । तीसरी चाल (छिपा वर्ग): हो तो चूँकि और बराबरी केवल पर होती है, ।
- (सम के लिए काम की)
- — एक ही अज्ञात जिसमें सब बँध जाता है
- घात:
शृंखला क्यों सच है? ; पहला गुणनखंड है, दूसरा , और अंतिम दो पद हैं। इसलिए ।
- देखिए कि कौन-सा संयोजन (, , ) बार-बार आ रहा है; उसे नाम दीजिए।
- वर्ग लेकर को में लिखिए ()।
- माँगा हुआ व्यंजक भिन्न/घात के रूप में तोड़िए (तालिका) और रखिए।
- गुणनफल में का रूप दिखे तो पहले उसे कीजिए।
- उत्तर पर एक कोण ( या ) रखकर जाँचिए।
- 1।
- 2वर्ग से: , अतः ।
- 3इसलिए ।
- 1दोनों कोष्ठकों में साझा है; एक में , दूसरे में । इसलिए गुणनफल ।
- 2फैलाइए: । चूँकि , यह हो जाता है।
- 3अंत में ।
- 1शृंखला से है, जहाँ । इसलिए ।
- 2, अतः ।
- 3अब ।
त्रिभुज के कोण समांतर श्रेणी में
जब प्रश्न कहे कि कोण समांतर श्रेणी में हैं तो मध्य कोण होता है; , लिखकर या शर्त मानने वाले कोण रखकर हल।
तीन संख्याएँ समांतर श्रेणी (AP) में हों तो बीच वाली उनका औसत होती है और अंतर समान रहता है: । यदि ये त्रिभुज के कोण हैं तो से , यानी , और , । चित्र में बदलता है, कोण घटता और बढ़ता है पर सदा रहता है।
काम की बात: और के (या ) का योग सरल हो जाता है। (बीच के पद कटते हैं); इसी तरह । दोनों में साझा है, इसलिए भाग देने पर वह कट जाता है और बचता है।
- त्रिभुज के तीन कोण, AP में
- सार्व अंतर ()
- मध्य कोण (तभी जब )
मान रखने का तरीका: शर्त को मानने वाले कोण चुनिए, जैसे () या ()। भी AP है () पर उसमें होने से कई व्यंजक या एक जैसे मान देते हैं; इसे मत चुनिए। हमेशा दो अलग से जाँचिए।
- कोणों का योग देखिए। त्रिभुज हो तो मध्य कोण ।
- , लिखिए (या शर्त से निकालिए, जैसे “सबसे बड़ा कोण सबसे छोटे का तीन गुना”)।
- के योग को , से बदलिए; कटाइए।
- जाँच: दो अलग वाले कोण रखकर।
- 1कोण AP में हैं और योग है, इसलिए मध्य कोण ।
- 2सबसे छोटा , इसलिए ।
- 3सबसे बड़ा । जाँच: ✓।
- 1, , ।
- 2अंश: (बीच के कट जाते हैं)।
- 3हर: (यहाँ कटते हैं)।
- 4भाग: । ( क्योंकि ।)
- 1, , इसलिए कोण ।
- 2सीधे: ।
- 3सूत्र से जाँच: ; ; योग ✓।
का विलोपन
दो समीकरणों से हटाकर और का सीधा संबंध निकालना: मूल विधि, मानक रूप और दो कोणों वाले प्रश्न।
विलोपन की मूल विधि
, से हटाना: कब वर्ग-योग, कब वर्ग-अंतर, कब जोड़-घटाव के बाद गुणा।
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मानक रूप: दीर्घवृत्त, अतिपरवलय, वृत्त
परीक्षा में बार-बार आने वाले रूप, उनके विलोपन और वे वक्र जो बिंदु बनाता है; वाले चलते चित्र के साथ।
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दो रैखिक समीकरण और दो कोण
जब , दोनों समीकरणों में मिले हों तो उन्हें हल करना; और दो कोणों में से एक हटाकर दूसरे का मान निकालना।
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एक ही अनुपात में लिखना
व्यंजक को या जैसे एक ही अनुपात में लिखकर मान निकालना या समीकरण हल करना।
सब कुछ में
जब दिया हो तो और वाले व्यंजक का मान: अंश और हर को की घात से भाग देकर।
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एक फलन में लिखना और समीकरण हल करना
आदि से पूरे समीकरण को एक फलन में लाकर द्विघात हल करना और अवास्तविक मूल छाँटना; सर्वसमिका सिद्ध करने की चालें।
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रेडियन, चाप और पहिए
कोण को रेडियन में नापना, अंश-मिनट-सेकंड के साथ बदलना, चाप की लंबाई, त्रिज्यखंड का क्षेत्रफल और घूमते पहिए।
अंश, मिनट, सेकंड और रेडियन
कोण को रेडियन में समझना (चाप को त्रिज्या के टुकड़ों में काटकर), दोनों दिशाओं में बदलना और रेडियन के सही मान की चर्चा।
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चाप की लंबाई और त्रिज्यखंड
रेडियन में , त्रिज्यखंड का क्षेत्रफल और परिमाप, चित्रों के साथ।
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पहिए, पट्टे और घूमने की चाल
लुढ़कते पहिए की दूरी, घूमने की चाल रेडियन प्रति सेकंड में, और पट्टे/दाँतेदार पहियों का संबंध।
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घड़ी के कोण
घड़ी की दोनों सुइयों की चाल से उनके बीच का कोण और यह कि सुइयाँ कब मिलेंगी या समकोण बनाएँगी।
दिए हुए समय पर सुइयों के बीच कोण
मिनट की सुई प्रति मिनट और घंटे की सुई प्रति मिनट चलती है; इनसे और उसके जाल।
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सुइयाँ कब मिलेंगी या कोण बनाएँगी
दिए हुए कोण (मेल, समकोण, आमने-सामने) पर सुइयाँ कब होंगी और एक दिन में कितनी बार, सापेक्ष चाल से।
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सार, मिश्रित अभ्यास, दोहराव
सभी विधियों की एक-पृष्ठ तालिका, परीक्षा जैसे मिले-जुले प्रश्न और दोहराव कार्ड।
सभी विधियों का सार
हर विधि: प्रश्न कैसे पहचानें और कौन-सा सूत्र या शॉर्टकट लगाएँ।
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मिश्रित अभ्यास (परीक्षा जैसा)
SSC CGL/CHSL/CPO जैसे मिले-जुले प्रश्न — पहले विधि पहचानिए, फिर हल कीजिए।
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दोहराव कार्ड
मुख्य सूत्र और नियम, छोटे प्रश्न-उत्तर कार्डों में।
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