चक्रवृद्धि ब्याज: विधियाँ और शॉर्टकट
SSC CGL · CHSL · CPO — विधि-दर-विधि
साधारण ब्याज (SI) में हर वर्ष ब्याज केवल मूल रक़म (मूलधन, ) पर लगता है। चक्रवृद्धि ब्याज (CI) में हर वर्ष के अंत में ब्याज मूलधन में जुड़ जाता है और अगले वर्ष उस बढ़ी हुई रक़म पर ब्याज लगता है। इसलिए ब्याज भी ब्याज कमाता है। अंत में मिलने वाली कुल रक़म को मिश्रधन () कहते हैं: ।
- मूलधन
- वार्षिक दर (%)
- वर्षों की संख्या
- मिश्रधन
सूत्र सही है, पर परीक्षा में बड़ी घातों का गुणा समय खा जाता है। इसलिए इस अध्याय में हम विधियाँ सीखेंगे: दर को भिन्न में बदलकर अनुपात विधि, हर वर्ष का ब्याज अलग दिखाने वाला ब्याज-ट्री, और उन्हीं से निकले छोटे सूत्र। हर विधि के बाद हल किए उदाहरण हैं और फिर अभ्यास प्रश्न — पहले ख़ुद हल कीजिए, फिर हल खोलिए।
नींव: जोड़ो नहीं, गुणा करो
चक्रवृद्धि ब्याज को क्रमिक प्रतिशत परिवर्तन की तरह देखना, अनुपात विधि और प्रभावी प्रतिशत।
इन तीन विधियों पर पूरा अध्याय टिका है। पहले इन्हें अच्छी तरह समझ लीजिए।
क्रमिक प्रतिशत परिवर्तन
एक के बाद एक प्रतिशत बदलाव — यही चक्रवृद्धि ब्याज की जड़ है।
विचार
मान लीजिए किसी चीज़ का दाम पहले 20% बढ़ा, फिर 10% और बढ़ा। कुल बढ़त 30% नहीं है, क्योंकि दूसरी बढ़त नए दाम पर लगती है, पुराने पर नहीं। 100 का दाम पहले 120 हुआ; अब 10% का मतलब 120 का 10% = 12, यानी 132। कुल बढ़त 32%।
यह अतिरिक्त 2% कहाँ से आया? दूसरी बढ़त (10%) ने पहली बढ़त (20) पर भी काम किया: 20 का 10% = 2। चक्रवृद्धि ब्याज ठीक यही है — हर वर्ष की वृद्धि पिछले वर्षों की वृद्धि पर भी लगती है।
- दोनों प्रतिशत परिवर्तन
- एक परिवर्तन का दूसरे परिवर्तन पर असर
भिन्न वाला तरीक़ा: 10% , यानी बढ़त में 10 → 11 और कमी में 10 → 9। हर परिवर्तन का अनुपात लिखकर सबको गुणा कर दीजिए; पहले और अंतिम मान का अंतर ÷ पहला मान × 100 = कुल प्रतिशत।
| प्रतिशत | भिन्न | बढ़त का अनुपात | कमी का अनुपात |
|---|---|---|---|
| 5% | 20 : 21 | 20 : 19 | |
| 10% | 10 : 11 | 10 : 9 | |
| 8 : 9 | 8 : 7 | ||
| 6 : 7 | 6 : 5 | ||
| 20% | 5 : 6 | 5 : 4 | |
| 25% | 4 : 5 | 4 : 3 | |
| 3 : 4 | 3 : 2 | ||
| 15% | 20 : 23 | 20 : 17 |
कदम
- हर परिवर्तन को चिह्न के साथ लिखिए: बढ़त , कमी या छूट ।
- पहले दो को से मिलाइए।
- तीसरा परिवर्तन हो तो उसे इस परिणाम के साथ फिर उसी सूत्र से मिलाइए।
- उत्तर धनात्मक हो तो कुल वृद्धि, ऋणात्मक हो तो कुल कमी। 100 से शुरू करके जाँच लीजिए।
- 1प्रतिशत के प्रश्न 100 पर सबसे आसान होते हैं, इसलिए पुराना दाम 100 मान लेते हैं। 20% बढ़ने पर दाम हुआ।
- 2अब 10% की बढ़त नए दाम 120 पर है, 100 पर नहीं: 120 का 10% = 12, इसलिए दाम ।
- 3कुल मिलाकर 100 → 132, यानी 32% की वृद्धि।
- 4सूत्र से भी वही: । अतिरिक्त 2, 20 की बढ़त पर लगी 10% बढ़त है।
- 1छूट दाम घटाती है, इसलिए तीनों को ऋण चिह्न के साथ लिखते हैं: ।
- 2पहली दो छूटें मिलाइए: । यानी 25% और 20% मिलकर 40% छूट के बराबर हैं (45% नहीं)।
- 3अब को तीसरी छूट से मिलाइए: ।
- 4जाँच 100 से: 100 → 75 → 60 → 54। ग्राहक 100 के बदले 54 देता है, यानी 46% छूट।
- 125% , यानी हर 4 रुपये 5 हो जाते हैं: अनुपात ।
- 220% , यानी हर 5 रुपये 6 हो जाते हैं: अनुपात ।
- 3दोनों बदलाव एक के बाद एक हैं, इसलिए अनुपातों को गुणा कीजिए: पहले , बाद में ।
- 420 पर 10 की वृद्धि ⟹ । सूत्र से: ✓।
- 1हर वर्ष 25% की बढ़त = तीन क्रमिक बढ़तें ।
- 2भिन्न विधि: 25% ⟹ हर वर्ष । तीन वर्ष में ।
- 364 पर 61 की बढ़त ⟹ । (सूत्र से: , फिर ।)
- 4₹6,400 = 64 इकाई, यानी 1 इकाई = ₹100; ब्याज = 61 इकाई = ₹6,100।
अनुपात (इकाई) विधि
दर को भिन्न में लिखकर मूलधन, मिश्रधन और ब्याज को इकाइयों में देखना।
विचार
मान लीजिए दर 10% है, यानी । तो हर 10 रुपये एक वर्ष में 11 रुपये बनते हैं: एक वर्ष के लिए मूलधन : मिश्रधन = 10 : 11। दूसरे वर्ष फिर यही गुणा होता है, इसलिए 2 वर्ष में और 3 वर्ष में । ब्याज = दोनों का अंतर: 2 वर्ष में 21 इकाई, 3 वर्ष में 331 इकाई।
यहाँ “इकाई” एक अनजानी रक़म है। प्रश्न में मूलधन, मिश्रधन या ब्याज में से कोई एक दिया हो तो उससे 1 इकाई का मान निकल आता है, और फिर बाकी सब। यह सूत्र ही है — बस भिन्नों में, जिससे हिसाब मन में हो जाता है।
- दर, सबसे छोटे भिन्न में
| दर | भिन्न | 1 वर्ष P : A | 2 वर्ष P : A | 3 वर्ष P : A |
|---|---|---|---|---|
| 5% | 20 : 21 | 400 : 441 | 8000 : 9261 | |
| 10% | 10 : 11 | 100 : 121 | 1000 : 1331 | |
| 8 : 9 | 64 : 81 | 512 : 729 | ||
| 6 : 7 | 36 : 49 | 216 : 343 | ||
| 20% | 5 : 6 | 25 : 36 | 125 : 216 | |
| 25% | 4 : 5 | 16 : 25 | 64 : 125 | |
| 7 : 8 | 49 : 64 | 343 : 512 | ||
| 15% | 20 : 23 | 400 : 529 | 8000 : 12167 |
कदम
- दर को सबसे छोटे भिन्न में लिखिए।
- एक वर्ष का अनुपात लिखिए।
- वर्षों की संख्या जितनी घात लीजिए; ब्याज = दोनों भागों का अंतर।
- दी गई रक़म जिस भाग की है, उससे 1 इकाई निकालिए।
- माँगे गए भाग को 1 इकाई से गुणा कीजिए।
- 120% , यानी हर 5 रुपये एक वर्ष में 6 बनते हैं: ।
- 22 वर्ष में यह गुणा दो बार होता है: । ब्याज इकाई।
- 3मूलधन 25 इकाई = ₹6,250 ⟹ 1 इकाई ।
- 4ब्याज । सूत्र से जाँच: , , ब्याज ✓।
- 1, यानी एक वर्ष में ।
- 23 वर्ष के लिए घन लीजिए: । ब्याज इकाई।
- 3217 इकाई ⟹ 1 इकाई ।
- 4मूलधन ।
- 1, यानी एक वर्ष में ।
- 22 वर्ष: । यहाँ मिश्रधन दिया है, इसलिए 64 इकाई वाले भाग से शुरू करते हैं।
- 364 इकाई ⟹ 1 इकाई ।
- 4मूलधन ; ब्याज ।
- 115% । यहाँ अंश 1 नहीं, 3 है: हर 20 रुपये एक वर्ष में 23 बनते हैं, ।
- 22 वर्ष: ; ब्याज इकाई।
- 3129 इकाई ⟹ 1 इकाई ।
- 4मूलधन , मिश्रधन ।
प्रभावी प्रतिशत (2 और 3 वर्ष)
जब दर का भिन्न सुविधाजनक न हो (6%, 7%, 9%…) तो ब्याज को मूलधन के प्रतिशत के रूप में निकालना।
विचार
7% का भिन्न है — इसकी घातें बड़ी संख्याएँ देती हैं। ऐसे में क्रमिक प्रतिशत का सूत्र सीधे लगाइए: 2 वर्ष में और की दो क्रमिक बढ़तें हैं, इसलिए कुल बढ़त प्रतिशत। यही प्रभावी प्रतिशत है: 2 वर्ष का ब्याज मूलधन का इतने प्रतिशत होता है।
3 वर्ष के लिए इसे तीसरे से फिर मिलाने पर आता है। तीनों पदों का अर्थ: = तीन वर्ष का साधारण ब्याज, = ब्याज पर ब्याज के तीन टुकड़े, = ब्याज-पर-ब्याज पर ब्याज।
| दर | 2 वर्ष का ब्याज (% of P) | 3 वर्ष का ब्याज (% of P) |
|---|---|---|
| 4% | 8.16% | 12.4864% |
| 5% | 10.25% | 15.7625% |
| 6% | 12.36% | 19.1016% |
| 8% | 16.64% | 25.9712% |
| 10% | 21% | 33.1% |
| 12% | 25.44% | 40.4928% |
| 15% | 32.25% | 52.0875% |
| 20% | 44% | 72.8% |
कदम
- वर्षों के अनुसार प्रभावी प्रतिशत निकालिए (2 वर्ष या 3 वर्ष का सूत्र)।
- ब्याज = मूलधन × प्रभावी % ÷ 100।
- मूलधन पूछा हो तो उलटा: मूलधन = ब्याज × 100 ÷ प्रभावी %।
- 16% का भिन्न है, जिसकी घातें बड़ी हैं; इसलिए प्रभावी प्रतिशत लेते हैं।
- 22 वर्ष का प्रभावी % ।
- 3ब्याज ।
- 13 वर्ष का प्रभावी % , ।
- 2।
- 3ब्याज ।
- 12 वर्ष का प्रभावी % , यानी ब्याज मूलधन का 18.81% है।
- 2मूलधन × ⟹ मूलधन ।
वर्षवार ब्याज-ट्री और CI − SI
ब्याज को “मूलधन पर ब्याज” और “ब्याज पर ब्याज” में तोड़कर हर वर्ष का ब्याज, CI−SI और उनसे जुड़े अनुपात।
यह भाग All Access में शामिल है।
पास लेने पर इस अध्याय के सारे उदाहरण, अभ्यास प्रश्न और हल खुल जाएँगे।
ब्याज-ट्री: 2 वर्ष
दो वर्षों का ब्याज मूलधन पर ब्याज और ब्याज पर ब्याज में बाँटकर देखना।
यह भाग All Access में शामिल है।
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ब्याज-ट्री: 3 वर्ष
तीन वर्षों में हर वर्ष का ब्याज, कुल CI और CI−SI।
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CI − SI के सूत्र
2 और 3 वर्ष के अंतर के सूत्र और उनसे मूलधन या दर निकालना।
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CI और SI के अनुपात वाले प्रश्न
CI : SI, CI₂ : SI₁, D₃ : D₂ जैसे अनुपातों से दर निकालना।
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लगातार वर्षों का संबंध
किसी वर्ष का ब्याज (या मिश्रधन) अगले वर्ष R% बढ़ जाता है — इससे दर और मूलधन निकालना।
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जब दर या अवधि बदले
हर वर्ष अलग दर, पूरे वर्षों के साथ कुछ महीने/दिन, और साल में एक से अधिक बार ब्याज जुड़ना।
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हर वर्ष अलग दर
पहले, दूसरे, तीसरे वर्ष अलग-अलग दरें — गुणक अलग, फिर सबका गुणा।
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पूरे वर्ष + कुछ महीने/दिन
वार्षिक संयोजन में 2 वर्ष 4 माह या 1 वर्ष 73 दिन जैसा समय।
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छमाही और तिमाही संयोजन
जब ब्याज साल में दो या चार बार मूलधन में जुड़ता है।
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उलटे प्रश्न: दर, समय, मूलधन
मिश्रधन ज्ञात हों तो दर, समय या मूलधन निकालना।
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मूल लेकर दर या समय
मूलधन और मिश्रधन से दर (मूल लेकर) या समय (घात पहचानकर)।
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“x गुना” वाले प्रश्न
राशि कुछ वर्षों में दोगुनी/तिगुनी हो — तब किसी और गुने का समय या दर।
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दो समयों पर दो मिश्रधन
दो अलग समयों के मिश्रधन से दर और मूलधन।
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कर्ज़: किस्तें, भुगतान, बँटवारा
बराबर वार्षिक किस्तें, हर वर्ष कुछ रक़म लौटाना, और राशि को ऐसे बाँटना कि बाद में सबको बराबर मिले।
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बराबर वार्षिक किस्तें
कर्ज़ को बराबर वार्षिक किस्तों में चुकाना — किस्त से कर्ज़ या कर्ज़ से किस्त।
यह भाग All Access में शामिल है।
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हर वर्ष कुछ रक़म लौटाना
कर्ज़ में हर वर्ष के अंत में कुछ रक़म लौटाई जाए — आख़िर में कितना बचा, या पहले कितना दिया।
यह भाग All Access में शामिल है।
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वृद्धि और ह्रास
चक्रवृद्धि का सूत्र पैसे के बाहर: जनसंख्या, पेड़, जीवाणु, और मशीन या वाहन की घटती कीमत।
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जनसंख्या वृद्धि
जनसंख्या का बढ़ना-घटना, अलग-अलग वर्षों में अलग दर, जन्म और मृत्यु दर, और पीछे का मान।
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ह्रास (घटती कीमत)
मशीन, वाहन, कंप्यूटर की कीमत हर वर्ष प्रतिशत से घटना।
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सार, मिश्रित अभ्यास, दोहराव
सभी विधियों की एक सारणी, परीक्षा जैसे मिले-जुले प्रश्न और दोहराव कार्ड।
सभी विधियों का सार
प्रश्न पढ़ते ही विधि चुनने के लिए एक पन्ना।
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मिश्रित अभ्यास — सेट 1
हर प्रकार के प्रश्न मिले-जुले; पहले विधि पहचानिए, फिर हल कीजिए।
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मिश्रित अभ्यास — सेट 2
परीक्षा के कठिन छोर के मिले-जुले प्रश्न।
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दोहराव — कार्ड और जाल
हर कार्ड का प्रश्न पढ़कर पहले ख़ुद सोचिए, फिर पलटिए।
यह भाग All Access में शामिल है।
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