गुणनखंड, अंत के शून्य और आवर्ती दशमलव
SSC CGL · CHSL · CPO — विधि-दर-विधि
जो संख्या किसी संख्या को पूरा-पूरा बाँट दे, वह उसका गुणनखंड (factor) है: 12 के गुणनखंड 1, 2, 3, 4, 6, 12 हैं। और अभाज्य संख्या वह है जिसके केवल दो गुणनखंड हों — 1 और वह स्वयं: 2, 3, 5, 7, 11, 13 …। एक पक्की बात: हर संख्या अभाज्य संख्याओं के गुणनफल के रूप में केवल एक ही तरह से लिखी जा सकती है (क्रम बदलने को छोड़कर)। यही संख्या की “उँगली की छाप” है, और इस पूरे अध्याय की चाबी भी।
एक बार किसी संख्या को जैसे रूप में लिख लें, तो परीक्षा के तीन बड़े प्रश्न-प्रकार इसी रूप से सीधे पढ़ लिए जाते हैं:
| भाग | प्रश्न कैसा | किस चीज़ से हल |
|---|---|---|
| 1. गुणनखंड | कितने गुणनखंड? उनका योग? कितनी जोड़ियाँ? पूर्ण वर्ग? | घातों को (घात + 1) से गुणा |
| 2. अंत के शून्य | या गुणनफल के अंत में कितने शून्य? | 2 और 5 की जोड़ियाँ गिनना |
| 3. आवर्ती दशमलव | भिन्न → दशमलव → भिन्न, जोड़-घटाव, तुलना, -वाँ अंक | हर में 2, 5 और बाकी अभाज्य; 9 और 0 वाले हर |
भाग 1 — गुणनखंड
अभाज्य गुणनखंडन से गुणनखंडों की गिनती, योग, गुणनफल, सम-विषम और जोड़ियाँ।
पाँच विधियाँ हैं, और हर अगली पिछली पर टिकी है। पहले संख्या को अभाज्य गुणनखंडों में तोड़ना सीखिए; बाकी सब उसी का फल है।
अभाज्य गुणनखंडन और फ़ैक्टर-ट्री
संख्या को अभाज्य संख्याओं के गुणनफल में तोड़ना और अभाज्य गुणनखंडों की गिनती।
विचार
एक संख्या जैसे 924 लीजिए। यह सम है, इसलिए 2 से कटती है: । 462 भी सम है: । 231 का अंक-योग 6 है, इसलिए 3 से कटती है: । और । अब हर टुकड़ा अभाज्य है, रुक जाइए। । यही अभाज्य गुणनखंडन है। हर बार सबसे छोटे अभाज्य से भाग देना सबसे सुरक्षित है, क्योंकि इस तरह कोई अभाज्य छूटता नहीं।
- दी हुई संख्या
- अलग-अलग अभाज्य संख्याएँ, छोटी से बड़ी
- हर अभाज्य की घात (वह कितनी बार आया)
| कौन-सा अभाज्य आज़माएँ | कब कटेगी | कारण |
|---|---|---|
| 2 | अंतिम अंक सम | 10 का गुणज 2 से कटता है |
| 3 | अंकों का योग 3 से कटे | (mod 3) |
| 5 | अंतिम अंक 0 या 5 | 10 का गुणज 5 से कटता है |
| 7 | अंतिम अंक का दुगुना बाकी में से घटाएँ; 7 से कटे तो कटेगी | |
| 11 | एक-एक छोड़कर अंकों के योग का अंतर 0 या 11 का गुणज | (mod 11) |
यहाँ: = अंतिम अंक के बाईं ओर की पूरी संख्या, = अंतिम अंक (7 वाली पंक्ति में); (mod ) का अर्थ “ से भाग देने पर शेषफल”।
अभाज्य गुणनखंडों की गिनती
“कितने अभाज्य गुणनखंड?” के दो अर्थ हैं। में अलग-अलग अभाज्य 4 हैं (2, 3, 7, 11), पर अगर हर अभाज्य को उतनी बार गिनें जितनी बार वह आया, तो अभाज्य गुणनखंड हैं। परीक्षा में दूसरा अर्थ आम है — घातों का योग। जब गुणनफल में कोई आधार अभाज्य न हो (जैसे ), पहले उसे तोड़िए: ।
- के अभाज्य गुणनखंडों की संख्या (दोहराव सहित)
- मानक रूप में अभाज्यों की घातें
कदम
- संख्या को सबसे छोटे अभाज्य (2, फिर 3, 5, 7 …) से तब तक भाग दीजिए जब तक वह कटे; हर भाग का भागफल लिखते जाइए।
- जब भागफल 1 हो जाए (या अभाज्य बच जाए), रुकिए।
- एक ही अभाज्य के बार-बार आने को घात में लिखिए।
- गुणा करके जाँचिए कि मूल संख्या वापस आती है।
- 1756 सम है, इसलिए 2 से भाग: ; फिर । 189 विषम है, इसलिए 2 अब नहीं चलेगा।
- 2189 का अंक-योग , यानी 3 से कटेगी: , , । 7 अभाज्य है, रुकिए।
- 3भाजक 2, 2, 3, 3, 3 और अंत में 7 हैं, इसलिए ।
- 4जाँच: ✓
- 1आधार 4, 9 और 35 अभाज्य नहीं हैं, इसलिए पहले उन्हें तोड़ते हैं: ; ; ।
- 2पूरा गुणनफल बना।
- 3कुल अभाज्य गुणनखंड = घातों का योग ।
- 4अलग-अलग अभाज्य: 2, 3, 5, 7, 11 — यानी 5।
- 1, इसलिए लगभग 38.9 है। हमें केवल 37 तक के अभाज्य आज़माने हैं: 2, 3, 5, 7, 11, 13, 17, 19, 23, 29, 31, 37।
- 2अंतिम अंक 7 है, इसलिए 2 और 5 नहीं; अंक-योग , इसलिए 3 नहीं। : , शेष 5 — नहीं। 11: — नहीं।
- 313: , शेष 9 — नहीं। 17: , शेष 4 — नहीं। 19: , शेष 16 — नहीं। 23: , शेष 22 — नहीं। 29: , शेष 9 — नहीं। 31: , शेष 29 — नहीं।
- 437: — कट गई! 41 अभाज्य है।
गुणनखंडों की संख्या
घातों में 1 जोड़कर गुणा करने से सारे गुणनखंडों की गिनती।
विचार
को देखिए। 72 का कोई भी गुणनखंड के रूप का होगा, जहाँ 2 की घात केवल में से कोई हो सकती है (4 चुनाव) और 3 की घात केवल में से कोई (3 चुनाव)। हर जोड़ी एक अलग गुणनखंड देती है, इसलिए कुल गुणनखंड हैं। नीचे का चित्र यही सारणी है: पंक्ति = 2 की घात, स्तंभ = 3 की घात, और हर खाना एक गुणनखंड।
- के गुणनखंडों की संख्या
- में अभाज्यों की घातें
“+1” क्यों? क्योंकि घात शून्य भी हो सकती है — यानी वह अभाज्य उस गुणनखंड में आए ही नहीं। के लिए चुनाव हैं: घात से एक ज़्यादा। इसी से 1 (सब घातें 0) और (सब घातें पूरी) भी गिनती में आ जाते हैं।
| का रूप | गुणनखंडों की संख्या | उदाहरण |
|---|---|---|
| (अभाज्य) | 2 | 13: 1, 13 |
| 3 | 49: 1, 7, 49 | |
| : 7 | ||
| 4 | 15: 1, 3, 5, 15 | |
| 6 | 12: 1, 2, 3, 4, 6, 12 |
यहाँ अलग-अलग अभाज्य हैं और कोई घात। इससे दो उपयोगी बातें निकलती हैं: ठीक 3 गुणनखंड वाली संख्या हमेशा किसी अभाज्य का वर्ग होती है; ठीक 4 गुणनखंड वाली संख्या या तो होती है या ।
उलटा प्रश्न: संख्या ढूँढना
कभी गुणनखंडों की संख्या दी होती है और संख्या या घात पूछी जाती है। तब को गुणनखंडों के गुणनफल के रूप में तोड़िए: हर गुणनखंड (घात )। सबसे छोटी संख्या चाहिए तो सबसे बड़ी घात सबसे छोटे अभाज्य (2) को दीजिए, फिर 3 को, फिर 5 को। तोड़ने के सभी तरीके आज़माइए।
| को तोड़ें | घातें | संख्या |
|---|---|---|
| 12 | 11 | |
| 5, 1 | ||
| 3, 2 | ||
| 2, 1, 1 | ← सबसे छोटी |
कदम
- संख्या को अभाज्य गुणनखंडों में तोड़िए: ।
- हर घात में 1 जोड़िए: ।
- इन सबको गुणा कीजिए।
- प्रश्न की शर्त देखिए (1 और गिनें या नहीं) और उसी के अनुसार घटाइए।
- 1504 को तोड़िए: , , ; । इसलिए ।
- 2घातें 3, 2, 1 हैं; हर में 1 जोड़ने पर ।
- 3कुल गुणनखंड ।
- 1गुणनखंडों की संख्या ।
- 2।
- 3। जाँच: ✓
- 1 को गुणनखंडों में तोड़िए: ; ; ; । हर गुणनखंड घात है।
- 2घातें बनीं: , , , । सबसे बड़ी घात सबसे छोटे अभाज्य को देने पर: ; ; ; ।
- 3सबसे छोटी 180 है; जाँच: ✓
गुणनखंडों का योग और गुणनफल
सारे गुणनखंडों का योग, उनका गुणनफल और उनके व्युत्क्रमों का योग।
विचार: योग
पिछली विधि की सारणी में हर खाने में एक गुणनखंड था। अब उन सबको जोड़ना है। लीजिए: खाने हैं। पूरी सारणी का योग वही है जो को बिना खोले गुणा करने से बनता है — क्योंकि हर हर के साथ ठीक एक बार जोड़ी बनाता है। तो ।
- के सभी गुणनखंडों का योग
- का कोई अभाज्य और उसकी घात
- सब अभाज्यों के लिए गुणा
गुणनफल और व्युत्क्रमों का योग
गुणनखंडों को जोड़ियों में बाँधिए: और का गुणनफल हमेशा है। गुणनखंड हों तो जोड़ियाँ बनती हैं और हर जोड़ी देती है, इसलिए सब गुणनखंडों का गुणनफल है। (जब पूर्ण वर्ग है, बीच का गुणनखंड अकेला रह जाता है, फिर भी वही सूत्र सही रहता है।)
- सब गुणनखंडों का गुणनफल
- गुणनखंडों की संख्या
- गुणनखंडों का योग
व्युत्क्रमों का योग इसलिए है कि और भी स्वयं एक गुणनखंड है; इसलिए । उचित गुणनखंडों (स्वयं को छोड़कर) का योग है। अगर यह के बराबर निकले तो संख्या पूर्ण संख्या है (6, 28, 496)।
कदम
- अभाज्य गुणनखंडन लिखिए।
- हर अभाज्य के लिए कोष्ठक का मान निकालिए।
- सब कोष्ठक गुणा करने पर योग ; गुणनफल चाहिए तो निकालकर ।
- 1।
- 2कोष्ठक: के लिए ; के लिए ; के लिए ।
- 3योग ।
- 1, इसलिए । गुणनफल ।
- 2। (जाँच: गुणनखंड 1, 2, 3, 4, 6, 9, 12, 18, 36 में चार जोड़ियाँ 36 देती हैं और बीच का 6 बचता है: ✓)
- 3, इसलिए और गुणनफल ।
- 1(क) । ।
- 2उचित गुणनखंडों का योग , जो संख्या के बराबर है — इसलिए 496 पूर्ण संख्या है।
- 3(ख) ; । व्युत्क्रमों का योग ।
सम, विषम और ख़ास गुणनखंड
सम और विषम गुणनखंडों की गिनती व योग, किसी संख्या के गुणज वाले गुणनखंड, वर्ग और घन गुणनखंड।
विचार
का हर गुणनखंड है। गुणनखंड विषम तब है जब उसमें 2 आए ही नहीं, यानी । गुणनखंड सम तब है जब उसमें कम से कम एक 2 हो, यानी । गिनती का नियम पहले जैसा ही है, बस 2 के चुनाव बदल जाते हैं:
| कौन-से गुणनखंड | गिनती | योग |
|---|---|---|
| सभी | ||
| विषम () | 2 का कोष्ठक हटा दीजिए | |
| सम () | ||
| के गुणज () | ||
| पूर्ण वर्ग | घात सम ही रखिए | |
| पूर्ण घन | घात 3 का गुणज ही रखिए |
यहाँ: = अभाज्यों 2, 3, 7 की घातें; = गुणनखंडों की संख्या; = उनका योग; = का पूर्णांक भाग (दशमलव हटाकर)।
“ के गुणज” वाली पंक्ति सबसे काम की है। का जो गुणनखंड का गुणज हो, उसे लिख सकते हैं, और वह “कुछ” का गुणनखंड होना चाहिए। इसलिए के जितने गुणनखंड के गुणज हैं, उतने ही गुणनखंड के हैं। लेने पर सम गुणनखंडों की गिनती मिलती है, और योग — दोनों ऊपर वाली पंक्ति से मेल खाते हैं। लेने पर “शून्य पर ख़त्म होने वाले गुणनखंड” मिल जाते हैं।
कदम
- अभाज्य गुणनखंडन लिखिए।
- तय कीजिए कि प्रश्न किस अभाज्य की किन घातों को अनुमति देता है (सम: 2 की घात ; विषम: 2 की घात 0; का गुणज: की घातें पहले से घटाइए; वर्ग: सम घातें)।
- हर अभाज्य के लिए चुनावों की संख्या (गिनती के लिए) या उन चुनावों का कोष्ठक-योग (योग के लिए) लिखिए।
- सबको गुणा कीजिए।
- 1 और , इसलिए ।
- 2विषम गुणनखंडों में 2 आता ही नहीं: बाकी अभाज्यों के चुनाव ।
- 3सम गुणनखंडों में 2 की घात में से कोई — 4 चुनाव: ।
- 4जाँच: कुल ✓
- 1।
- 2विषम: 2 का कोष्ठक छोड़ दीजिए: ।
- 3सम: 2 का कोष्ठक के बिना: , इसलिए ।
- 4जाँच: कुल योग और ✓
- 1 (क्योंकि और )।
- 2(क) 15 के गुणज वाले गुणनखंड उतने ही हैं जितने के गुणनखंड: ।
- 3(ख) पूर्ण वर्ग में हर घात सम होनी चाहिए: 2 की घात (2 चुनाव), 3 की (2 चुनाव), 5 की (2 चुनाव): ।
- 4(ग) पूर्ण घन में हर घात 3 का गुणज: 2 की (2), 3 की (2), 5 की केवल (1): ।
पूर्ण वर्ग, जोड़ियाँ और गुणनफल के रूप
गुणनखंडों की जोड़ियाँ, पूर्ण वर्ग की पहचान, “दो गुणनखंडों के गुणनफल” के तरीके और पूर्ण वर्ग/घन बनाना।
विचार
का हर गुणनखंड अपना एक साथी रखता है, और दोनों का गुणनफल है। 30 में: , , , — 8 गुणनखंड, 4 जोड़ियाँ। लेकिन 36 में: , , , और । यहाँ 6 का साथी वह ख़ुद है, इसलिए वह अकेला गिना जाता है और कुल गुणनखंड — विषम।
- के गुणनखंडों की संख्या
कारण: विषम तभी होगा जब हर कोष्ठक विषम हो, यानी हर घात सम — और सब घातें सम हों तो संख्या वर्ग होती ही है। (लॉकर वाली पहेली: 100 लॉकर बंद हैं; विद्यार्थी हर -वाँ लॉकर पलटता है, से । अंत में लॉकर उतनी बार पलटा गया जितने उसके गुणनखंड हैं; खुला वही रहेगा जिसके गुणनखंड विषम हों — यानी 1, 4, 9, …, 100।)
जोड़ियों से जुड़े प्रश्न
| प्रश्न | उत्तर | स्थिति |
|---|---|---|
| के तरीके () | पूर्ण वर्ग नहीं | |
| पूर्ण वर्ग ( भी गिना) | ||
| दो अलग गुणनखंडों के तरीके | पूर्ण वर्ग | |
| क्रम का ध्यान रखकर ( पहला, दूसरा) | हमेशा | |
| सह-अभाज्य जोड़ियाँ (, ) | अलग अभाज्य, |
यहाँ: = के गुणनखंडों की संख्या; = में अलग-अलग अभाज्यों की संख्या। सह-अभाज्य जोड़ी में हर अभाज्य की पूरी घात या तो में जाती है या में (बाँटी नहीं जा सकती), इसलिए क्रमित तरीके और क्रमरहित।
पूर्ण वर्ग या पूर्ण घन बनाना
जिस अभाज्य की घात सम नहीं है, उसे एक बार और गुणा कीजिए (या एक बार भाग दीजिए); घन के लिए घात को 3 का गुणज बनाइए। सबसे छोटा गुणक/भाजक उन्हीं अभाज्यों का गुणनफल होता है जिनकी घात “अधूरी” है।
| घात | वर्ग बनाने को गुणा | वर्ग बनाने को भाग | घन बनाने को गुणा | घन बनाने को भाग |
|---|---|---|---|---|
| 1 | p | p | p | |
| 2 | — | — | p | |
| 3 | p | p | — | — |
| 4 | — | — | p | |
| 5 | p | p | p |
यहाँ: = उस अभाज्य की घात संख्या में; “—” का अर्थ कुछ नहीं करना।
कदम
- अभाज्य गुणनखंडन और निकालिए।
- पूर्ण वर्ग की जाँच: सब घातें सम (या विषम)।
- जोड़ियों वाले प्रश्न में सारणी की सही पंक्ति चुनिए (वर्ग है या नहीं, क्रम गिनना है या नहीं)।
- वर्ग/घन बनाने के लिए हर अभाज्य की घात देखकर गुणक या भाजक बनाइए।
- 1।
- 2सब घातें (4, 2, 2) सम हैं, इसलिए यह पूर्ण वर्ग है: ।
- 3गुणनखंडों की संख्या (विषम, जैसा होना चाहिए)।
- 4पूर्ण वर्ग है, इसलिए तरीके (जिनमें भी है)।
- 1।
- 2(क) वर्ग के लिए सब घातें सम चाहिए। 2 की घात 1 और 3 की घात 3 विषम हैं; 5 की घात 2 ठीक है। गुणक । परिणाम ✓
- 3(ख) घन के लिए घात 3 का गुणज चाहिए। 2 की घात 1 को 3 बनाने को चाहिए; 3 की घात 3 पहले से ठीक है; 5 की घात 2 को 3 बनाने को चाहिए। गुणक । परिणाम ✓
- 1चार अलग अभाज्य हैं: 2, 3, 5, 7, इसलिए ।
- 2सह-अभाज्य होने के लिए हर अभाज्य की पूरी घात एक ही गुणनखंड में जाएगी: पहले में या दूसरे में, पहले या दूसरे में, … — हर एक के 2 चुनाव।
- 3क्रम गिनने पर तरीके। पर और एक ही जोड़ी हैं, इसलिए क्रम न गिनने पर ।
भाग 2 — अंत के शून्य
किसी गुणनफल या के अंत में कितने शून्य होते हैं, और उलटा प्रश्न।
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शून्य कहाँ से आते हैं: 2 और 5 की जोड़ी
गुणनफल को अभाज्यों में तोड़कर 2 और 5 की जोड़ियाँ गिनना।
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के अंत के शून्य और लेजेंद्र का सूत्र
में किसी अभाज्य की सबसे बड़ी घात, और उसी से अंत के शून्य।
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उलटा प्रश्न: शून्य दिए हैं, ढूँढना
दिए शून्यों वाला सबसे छोटा/बड़ा , कितने संभव हैं, और कौन-सी शून्य-गिनतियाँ असंभव हैं।
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गुणनफल की श्रृंखलाएँ
क्रमागत संख्याओं की सीमा, किसी संख्या के गुणजों, केवल विषम संख्याओं, घात वाले पदों और फ़ैक्टोरियलों के गुणनफल में शून्य।
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भाग 3 — आवर्ती दशमलव
भिन्न कब सांत और कब आवर्ती दशमलव बनती है, आवर्ती दशमलव से भिन्न, उन पर संक्रियाएँ और उनकी तुलना।
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भिन्न से दशमलव: कब सांत, कब आवर्ती
लंबी भाग का शेषफल-चक्र, सांत की पहचान, दशमलव-स्थानों की गिनती और आवर्त की लंबाई।
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आवर्ती दशमलव से भिन्न
शुद्ध और मिश्र आवर्ती दशमलव को भिन्न में बदलना, और यह विधि क्यों काम करती है।
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आवर्ती दशमलव पर जोड़, घटाव, गुणा, भाग और मूल
दो तरीके: सबको भिन्न बनाकर संक्रिया, और जोड़-घटाव के लिए आवर्त को बराबर लंबा करके जोड़ना; साथ में कुछ तेज़ पैटर्न।
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तुलना, क्रम और -वाँ अंक
आवर्ती दशमलवों की तुलना, दशमलव के -वें स्थान का अंक और पहले अंकों का योग।
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सार, मिश्रित अभ्यास, दोहराव
सभी विधियों की एक सारणी, परीक्षा जैसे मिले-जुले प्रश्न और दोहराव कार्ड।
सभी विधियों का सार
प्रश्न पढ़ते ही विधि चुनने के लिए एक पन्ना।
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मिश्रित अभ्यास — सेट 1
तीनों भागों के मिले-जुले प्रश्न; पहले विधि पहचानिए, फिर हल कीजिए।
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मिश्रित अभ्यास — सेट 2
परीक्षा के कठिन छोर के मिले-जुले प्रश्न।
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दोहराव — कार्ड और जाल
हर कार्ड का प्रश्न पढ़कर पहले ख़ुद सोचिए, फिर पलटिए।
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